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डिप्रेशन और चिंता को भगाने के कुछ प्रैक्टिकल टिप्‍स

दोस्‍तों, पिछले लेख में हमने मानसिक समस्‍या के बारे में एक्‍सपर्ट की भूमिका के विषय में चर्चा की।

यहां हम बात करेंगे कुछ ऐसे Practical Tips के बारे में जिन्‍हें अपनाकर हम अपने Depression, Anxiety Disorder, Stress से काफी  हद  तक खुद ही लड़ सकते हैं।

वैसे तो बहुत से तरीके आपको  पढ़ने या सुनने  को मिले होंगे अगर आपने इस विषय पर जरा भी खोजबीन की है पर कई उपायों के पता होने के बावजूद  समस्‍या ये आती है कि हम उनको Follow नहीं कर पाते या कहें इतनी इच्‍छाशक्ति नहीं जुटा पाते और हमारा हाल समय गुजरने के बावजूद वही का वही रहता है। हम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाते। असल में होता ये है कि अवसाद यानी डिप्रेशन, अत्‍यधिक चिंता, एंजाइटी डिसऑर्डर और तनाव हमें उस स्थिति में ले आता  है कि हमारे Will Power की तो हवा ही निकल चुकी होती है ऐसे में यदि हमें कोई तरीका भी  इससे निकलने का पता हो तो उसे करना भी हमारे लिए कठिन हो जाता है क्‍याेंकि इन सारी समस्‍याओं से जूझ रहे व्‍यक्ति के लिए आसान से या सामान्‍य दिखने वाले काम तक करना कठिन होे जाता है स्‍वस्‍थ इंसान की तुलना में।



ऐसे में हम जानेें गे कि क्‍या ऐसे उपाय हैं जिन्‍हें जबरदस्‍ती खुद  पर थोपने की कोशिश करने और उसके बावजूद ना कर पाने पर खुद को कोसने की बजाय उनके आसान विकल्‍पों को जितना हो सके उतना करने  की कोशिश करें।


मेडीटेशन की बजाय अपना पसंदीदा विकल्‍प चुनें-
ध्‍यान अथवा Meditation करने की सलाह शायद सबसे ज्‍यादा दी जाने वाली  सलाह है। चाहे कोई मेंटल हेल्‍थ के विषय में जानता हो या ना जानता हो अक्‍सर सलाह देता है कि मेडीटेशन करो। पर मेडीटेशन करना इतना सरल या सामान्‍य सा काम नहीं है जितनी आसानी से इसे करने की सलाह देने वाले मिल जाते हैं। खासकर Mental Health Issues से जूझ रहे व्‍यक्ति के लिए तो ये और भी कठिन हो जाता है क्‍योंकि ना तो उसका मन किसी चीज में लगता है ना ही मन में चल रहे विचारों की भीड़ से वह एक मिनट भी निकल पाता है। सबसे बड़ी बात कि ध्‍यान के स्‍तर तक मन को लाने में बहुत लंबा समय लगता है जबकि समस्‍या का सामना कर रहे व्‍यक्ति के लिए एक जगह नियमित कुछ समय के लिए बैठना भी बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में वह हताश होकर इसे छोड़ देता है।
इसके बजाय आप कोई ऐसी एक्टिविटी चुनें जिसे करने में आपको ज्‍यादा कोशिश ना करनी पड़े। आप सुबह उठकर किसी बगीचे या शांत जगह पर कुछ देर बैठ सकते हैं। आप अपने पसंदीदा संगीत को भी सुन सकते हैं एक जगह बैठकर, वीडियो देखने की बजाय आंखें बंद करके ऑडियो सुनना ज्‍यादा सुकून दे सकता है।

प्राणायाम या डीप ब्रीदिंग की बजाय यह करें-
प्राणायाम वाकई एक बहुत ही अच्‍छा उपाय है मानसिक तकलीफों को काबू करने और मन को शांत रखने के लिए। परंतु इसे नियमित और अनुशासित तरीके से करते रहने से ही हमें इसके फायदे मिलेंगे। जब हमारी बेचैनी या उदासी बहुत ज्‍यादा होती है तो इस प्रकार का अनुशासन और निरंतरता मुश्किल हो जाती है। आजकल  Deep Breathing करने की भी सलाह बहुत दी जाती है। प्राणायाम एवं डीप ब्रीदिंग यानी गहरी सांस दोनों से ही हमारे शरीर में ऑक्‍सीजन का प्रवाह बढ़ता है जो तनाव को घटाता और मूड को अच्‍छा और शांत महसूस कराता है। इसके लिए हम ये भी कर सकते हैं कि पैदल चलते हुए गहरी सांसें लें। चाहे आप किसी पार्क में टहलें या घर की छत पर। इससे डीप ब्रीदिंग के साथ साथ सबसे आसान सा व्‍यायाम यानी Walking भी साथ में हो जाएगी।


कसरत अपने पसंदीदा विकल्‍पों में से चुनें-
कसरत निस्‍संदेह मानसिक रूप से आपको मजबूत बनाती है और इसे करने से हैप्‍पी हॉर्मोन एंडोर्फिन भी बनता है जिससे हम अच्‍छा महसूस करते हैं।अगरआपने पहले नियमित रूप से कसरत करने, फिटनेस पर काम करने जैसी गतिविधियों में हिस्‍सा नहीं लिया है और आप इसे एंजॉय नहीं करते  हैं तो शायद शुरू करने के बाद आप इसे नियमित ना रख पायें। पर खुशी की बात ये है कि हमारे माइंड में हैप्‍पी हॉर्मोन बनाने के लिए हमारे पास और भी विकल्‍प हैं जिन्‍हें करने से आपको शायद ज्‍यादा खुशी भी मिले।
आप कोई आउटडोर गेम खेल सकते हैं, अगर आपके घर पर  या  आसपास बच्‍चे हों तो उनके  साथ खेलने  में आपको ज्‍यादा मजा आएगा। आप Swimming कर सकते हैं। आपको यदि डांस करना पसंद है तो इसे करने से आपको बहुत अच्‍छा लगेगा। आप साईकिल से कहीं भी घूमने निकल जायें और सबसे आसान एक्‍सरसाइज है पैदल चलना आप लंबी वॉक पर निकल जाएं।

विटामिन डी लें-
विटामिन डी की कमी निराशाा और नकारात्‍मक विचारों ( Negative Thinking ) को बढ़ाती है। आजकल विटामिन डी की कमी की समस्‍या बहुत तेजी से बढ़ी है साथ ही साथ मानसिक बीमारियां भी बड़ी तेजी से बढ़ रही हैं। नियमित रूप से सुबह हल्‍की धूप में कम से कम 15-20 मिनट जरूर बिताएं और इस समय ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर को बहुत ज्‍यादा ना ढकें। 

इस प्रकार के लोगों से जरूर  मिलें-
मानसिक बीमारी के दौर में अक्‍सर हम अकेलापनऔर हीनभावना से ग्रसित हो जाते हैं। ऐसे में हम किस प्रकार के लोगों के साथ रहें इसका हमें ध्‍यान रखना होगा जैसे शारीरिक बीमारी में भी हमें कुछ परहेज करने पड़ते हैं। चाहे आप कैसा भी महसूस करें पर ऐसे लोगों के साथ जरूर समय बितायें जो आपको जज नहीं करते। आपकी सफलता, असफलता या किसी भी अन्‍य दूसरे कारण से उन्‍हें कोई फर्क नहीं पड़ता। वे बस आपके साथ हैं तो हैं। ऐसे लोगों का साथ आपके लिए टॉनिक की तरह काम करेगा। 

अपने शौक को जरूर पूरा करें-
भले आप दिनभर में केवल आधा घंटा ही निकाल पायें अपने शौक के लिए परंतु इसे नियमित करें एक थैरेपी की तरह। ना तो इसे समय की बर्बादी समझें ना दूसरे जरूरी कामों के लिए इसे छोडे़ं। ऐसे समझें कि अगर आपको किसी चोट अथवा बीमारी के बाद रोज एक फिजियोथैरेपिस्‍ट के यहां जाकर एक घंटा बिताना हाेता है तब आप इसे कभी मिस नहीं करते क्‍योंकि ये आपके शरीर को ठीक करने का सवाल है। तो जहां हमारा मन बीमार है तो हमें उसके लिए भी तो थैरेपी नियमित ही चाहिए। इसलिए इसके लिए समय जरूर निकालें।

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