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हमेशा चिंता करने से ऐसे बचें

चिंता के बुरे प्रभावों से तो हम अच्‍छे से परिचित हैं पर फिर भी चिंता करना नहीं छोड़ पाते। असल में चिंता करने वाले इंसान की ये आदत बन जाती है कि वह चिंता किये बिना रह नहीं पाता। एक चिंता खतम हुई तो दूसरी शुरू और हमेशा चिंतित रहने का ये अंतहीन सिलसिला कभी खतम ही नहीं होता।




तो कैसे चिंता के इस चक्रव्‍यूह को तोड़ा जाए ?

हम सबके शरीर के काम करने की एक सीमा होती है। हम एक निश्चित मात्रा तक ही वजन उठा सकते हैं उससे ज्‍यादा नहीं। उसी तरह हमें खुद को मानसिक रूप से संतुलित रखने के लिए भी यही बात समझनी होगी। हम अक्‍सर ऐसे विचारों का बोझा अपने दिमाग पे डालते जाते हैं जिनकी कोर्इ जरूरत नहीं। कल्‍पना करें कि ज्‍यादा बोझ उठाकर हम कितनी दूरी तक चल सकते हैं थोड़ा चलने से ही हम थक जायेंगे। पर हम अपने दिमाग की ये हालत कर देते हैं कि ये एक ओवरलोडेड गाड़ी की तरह धीरे-धीरे मुश्किल से चल पाता है फिर भी हम इस पर लोड बढ़ाये ही जा रहे हैं। ऐसे में दिमाग की काम करने की क्षमता का तो बुरा हाल होता ही है धीरे-धीरे दिमाग और शरीर दोनों ही खोखले होते जाते हैं।

चिंता या एंजाइटी परेशान करती ही क्‍यों है? इसका एक सीधा सा कारण है कि ऐसा व्‍यक्ति या तो बीते समय की बातों में डूबकर  परेशान रहता है या फिर भविष्‍य में कुछ बुरा ना हो जाए ऐसा सोच-सोचकर परेशान होता रहता है। जबकि वास्‍तविकता में दोनों ही बातें हमारी मेमोरी और कल्‍पना हैं बस। वास्‍तविकता में तो कुछ हैं ही नहीं। वास्‍तविकता में हमारे सामने है वर्तमान और उसी में रहना इस समस्‍या का हल है। पर सवाल ये है कि वर्तमान में रहा कैसे जाए ?

वर्तमान में कैसे रहना है इस विषय पर बहुत सा ज्ञान आपको मिल जाएगा। पर क्‍या वाकई ये इतना आसान है ? जवाब है नहीं और खासतौर पर ऐसे व्‍यक्ति के लिए जो लंबे समय से चिंता करने की आदत से परेशान है।

वर्तमान में जीना सीखने का एक बेहतरीन तरीका है आज के दिन में जीना और आज किये जाने वाले कामों को पूरा करना। आज के दिन में जीने का ये भी मतलब नहीं कि भविष्‍य की कोई योजना ना बनाएं। योजना जरूर बनाएं उसके बाद हर दिन हमें ये करना है कि आज के दिन में हम जितना कर सकते हैं बस उतना ही करना। अगर हम किसी समस्‍या से जूझ रहे हैं तो उसे हम एक दिन में दूर नहीं कर सकते। रोज जितना हो सकता है उतना करना शुरू करें तो एक ना एक दिन तो हम उससे भी बाहर निकल ही आयेंगे। 

अगर एक ही दिन में या एक ही बार में हम सारे काम करने की कोशिश करेंगे या एक ही झटके में किसी समस्‍या  को उखाड़ फेंकने की कोशिश करेंगे तो ये संभव तो नहीं पर नुकसान ये होगा कि आज जो कर रहे हैं उसे भी ठीक से नहीं कर पायेंगे। 

अगर हम आज का भोजन करते समय कल, परसों और आगे के दिनों में मिलने वाले भोजन की चिंता करें तो ना तो आज का भोजन ही हमें कोई पोषण देगा और अगर कई सारे दिनों का भोजन अगर हमें एक साथ दे भी दिया जाए तो क्‍या एक बार में हम उसे खा पायेंगे ?

कुछ बहुत नाउम्‍मीद हो चुके लोग तो अपने भविष्‍य की चिंताओं का बोझ इतना बढ़ा चुके होते हैं कि उनको लगता है कि अब उनके हाथ में कुछ भी नहीं है।

पर केवल और केवल ध्‍यान में रखने वाली सबसे बड़ी बात है कि बीता हुआ कल कैसा भी रहा हो और आने वाला कल कैसा भी हो, हर रोज हमें जो चौबीस घंटे मिले हैं, उनमें जीने से और उनका इस्‍तेमाल करने से हमें कोई रोक नहीं सकता। भले ही सब कुछ हमारे हाथों से फिसलता लग रहा हो पर आज का दिन तो हमारी मुट्ठी में है, इसे हमसे कोई नहीं छीन सकता। तो क्‍यों ना हम आज सुबह उठने से रात को सोने तक जो कर सकते हैं उसके बारे में ही सोचें।

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