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डिप्रेशन को बढ़ाने वाली इन आदतो को कहें बाय बाय

कई बार हमारी बहुत सी छोटी छोटी आदतें हमारी निगेटिव थिंकिंग या डिप्रेशन को और बढ़ा रही होती हैं। एक तरफ तो हम इससे बाहर निकलने की कोशिश कर रहे होते हैं। दूसरी तरफ कुछ बातें हमारी समस्‍या को और बढ़ा रही होती हैं। जरूरी नहीं कि हम जानबूझ कर ही इन आदतों को नहीं छोड़ना चाहते बल्कि होता ये है कि हमें अक्‍सर पता ही नहीं होता कि ये बातें भी हमारी परेशानी के लिए खाद-पानी का काम कर रही हैं।

ये बातें हैं तो बहुत छोटी पर इन पर थोड़ा सा ध्‍यान देने से ही आपकी समस्‍या काफी हद तक कंट्रोल में आ सकती है।



दोस्‍तों, हमें शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरीकों से स्‍वस्‍थ रखने में हमारी Daily Habits का बड़ा हाथ होता है। हमारी बहुत सी रोज की आदतों में कुछ ऐसी बातें शामिल होती हैं जो हमारी समस्‍या का कारण भी हो सकती हैं और उनको बढ़ाने का काम तो करती ही हैं। यहां हम किसी नयी आदत को शामिल करने के बारे में बात नहीं करेंगे। हम यहां चर्चा करेंगे कि कौन सी बातें हैं जिन्‍हें हमें या तो छोड़ना चाहिए या फिर उनकी तरफ ध्‍यान देना बंद कर देना चाहिए।

चलिए आज से ही इन आदतों को बाय-बाय कर देते हैं-

1- सबसे पहले हम ध्‍यान देंगे कि हमारे दिन की शुरुआत करने का क्‍या तरीका है। ज्‍यादातर लोग सुबह उठकर चाय-कॉफी से अपना दिन शुरू करते हैं। चाय-कॉफी आप ले सकते हैं पर इसमें थोड़ा सा बदलाव करें। सुबह उठकर सबसे पहले दो या तीन गिलास पानी पियें। ये आपके शरीर को ऊर्जा देगा और रात के लंबे अंतराल के बाद हाइड्रेट करेगा। चाय या काॅफी इसके कम से कम आधा घंटे बाद लें।

2- दूसरी बात भी सुबह की हमारी आदत से जुड़ी है- समाचार-पत्र पढ़ना। ये एक बहुत खतरनाक आदत है खासकर ऐसे व्‍यक्ति के लिए जिसका दिमाग पहले से ही नकारात्‍मक विचारों से भरा हुआ है। साथ ही दिनभर भी बेवजह और व्‍यर्थ की खबरों को सुनने, देखने और पढ़ने से बचें। केवल जरूरी  खबरें पढ़ें वो भी अपने जरूरी काम निपटाने के बाद।

4- ज्‍यादातर समय घर में ही गुजारना या अकेले रहने की आदत। डिप्रेशन के शिकार लोगों में अकेलेपन की भी आदत हो जाती है। डिप्रेशन हमारी ऊर्जा को बहुत कम कर देता है इसलिए भी हमारा मन कहीं जाने का नहीं होता। फिर धीर-धीरे यह आदत सी बन जाती है। बहुत ज्‍यादा नहीं पर कोशिश करें जितना हो सके खाली वक्‍त में घर के बाहर निकलें और लोगों से मिलें। कम से कम घर से लगी सड़क पर ही टहलना शुरू करें।

5- सूर्य की रोशनी से दूर रहना। सूरज की खुली धूप हमारे अंदर सकारात्‍मकता और ऊर्जा लाती है। कम रो‍शनी में या लंबे समय तक प्राकृतिक रोशनी से दूर रहने वाले लोगों में डिप्रेशन के लक्षण जल्‍दी आने लगते हैं। विटामिन डी की कमी निराशावादी विचारों को बढ़ाती है।

6- सुबह उठते ही फोन हाथ में  लेने की आदत और हर समय फोन चैक करने आदत। फोन में आने वाले नोटिफिकेशन आते ही चैक करते समय हम भूल जाते हैं कि उन्‍हें तुरंत ही ना देखने से हमारा कोई काम बिगड़ नहीं जाएगा जब तक वे हमारे व्‍यवसाय या काम से संबंधित ना हों। डिजिटल युग में आगे रहने का मतलब ये नहीं कि जिन बातों से हमारा कुछ बनना-बिगड़ना नहीं उन्‍हें बेवजह समय दिया  जाए।

7- सोशल मीडिया एक बहुत ही अच्‍छा टूल है लोगों से जुड़ने और उन तक अपनी बात पहुंचाने का। पर इसका बेवजह या यूं ही उपयोग करते रहने से केवल टाइम वेस्‍ट ही नहीं होता है बल्कि उससे भी बढ़कर ये हमें कई तरीकों से प्रभावित करता है। हम बेवजह दूसरों की लाइफ और लाइफस्‍टाइल पर इतना ध्‍यान देने लग जाते हैं और हमें लगता है कि दूसरों की जिंदगी में सब अच्‍छा चल रहा है और फिर हम अपने वर्तमान के प्रति शिकायतों से भर जाते हैं। ये एक प्रकार का एडिक्‍शन भी है और यदि हमारी जिंदगी में सब कुछ ठीक नहीं है या हम उतने सफल नहीं हैं तो दूसरों से तुलना कर अनजाने में ही हम अपनी निराशा को बढ़ाते हैं।

8- रात को सोने से पहले फोन,टीवी या कंप्‍यूटर में आंखें गड़ाये रखने कीआदत। रात होने पर हमारे दिमाग में मेलाटोनिन हार्मोन सक्रिय हो जाता है जो हमारी अच्‍छी नींद के लिए जरूरी है पर आज के डिजिटल युग की हमारी आदतों से अच्‍छी नींद के लिए जरूरी हारमोन का स्रावित होना प्रभावित होता है। हमारे शरीर और मन को आराम देने की सबसे बड़ी रिलैक्‍शेसन तकनीक है अच्‍छी नींद। अगर हम नींद अच्छी लेंगे तो ना तो हमें मन को शांति देने वाली तकनीकों, तरकीबों और थैरेपीज की खोज करनी होगी और हम बहुत हद तक अवसाद जैसी समस्‍याओं पर भी नियंत्रण कर सकेंगे। मनुष्‍य के अलावा किसी भी अन्‍य प्राणी को मन को शांत रखने के लिए और अच्‍छी नींद के लिए ना किसी से सलाह लेने की जरूरत पड़ती है ना ही किसी तकनीक को आजमाने की। ये अपने आप ही हो जाता है क्‍योंकि सभी जीव अपनी बॉडी-क्‍लॉक के अनुरूप दिनचर्या पर ही चलते हैं। जबकि हम अपनी जैविक घड़ी या Body Clock के विपरीत आदतें अपनाकर खुद ही अपने लिए परेशानी खड़ी करते हैं।

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