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मन को स्‍वस्‍थ और संतुलित रखने की दो चाबियां

जब भी हम किसी कठिनाई या संकट में होते हैं तो उससे निकलने के रास्‍ते भी ढूंढ़ते हैं। आज के इंटरनेट के युग में किसी भी विषय के बारे में खोजना जितना आसान हो गया है उतना पहले कभी नहीं था। आज हर तरह की सूचना और सलाह हमारे लिए उपलब्‍ध है पर सभी विकल्‍पों में से हम किसे चुनें ये भी अपने आप में एक समस्‍या है।

अक्‍सर समस्‍या ये नहीं होती कि उसका समाधान नहीं मिल रहा है बल्कि हम स्‍वयं ही निर्णय नहीं कर पाते कि सामने दिख रहे रास्‍तों में से कौन सा रास्‍ता चुनें।



और सबसे मजेदार बात ये है कि हम छोटी-छोटी बातों के लिए किसी बड़े उपाय की खोज में लग जाते हैं। अगर हम छोटी-छोटी बातों के लिए छोटे उपायों को ही पकड़ लें तो ज्‍यादातर समस्‍याओं का तुरत-फुरत समाधान हम स्‍वयं ही निकाल लेंगे।

जिस प्रकार हर ताले की चाबी होती है। उसी तरह जीवन की कठिनाईयों और तनाव से निपटने के लिए भी चाबियां हैं हम सबके पास और एक बड़ी खूबसूरत बात इनके साथ ये है कि इन चाबियों से  हम बहुत से ताले खोल सकते हैं। एक तरह से हम इन्‍हें मास्‍टर चाबी भी कह सकते हैं। इनमें से केवल दो चाभियां इतनी महत्‍वपूर्ण हैं कि हमारा ज्‍यादातर काम इनसे ही चल सकता है।

 जिन दो बातों या सूत्रों की मैं यहां बात करूंगा, वे काफी हद तक हमें मदद करेंगे जीवन में। इसके साथ ही हमें ये बात भी ध्‍यान में रखनी है कि ये इन बातों के प्रति हमें जागरूक होना होगा और लगातार इन बातों का ध्‍यान रखने से ये हमारे व्‍यक्तित्‍व का हिस्‍सा बन जाएंगी समय के साथ।

1- हममें से अधिकतर लोग शिकायतों से भरे हुए हैं चाहे वह जीवन के किसी भी पहलू से संबंध रखती हो। जिस वातावरण में हम रहते हैं यदि यहां ऐसे लोग ज्‍यादा हैं तो समस्‍या बढ़ जाती है क्‍योंकि जाने-अनजाने हम भी वैसे ही बन जाते हैं। पर इस चक्रव्‍यूह से निकलने की जिम्‍मेदारी भी हमें ही लेनी है। क्‍या आप सारी जिंदगी मजे से जीने की बजाय उसको शिकायतें करते रहने में बर्बाद करना चाहेंगे ? प्रश्‍न ये है कि जीवन में हम इतनी शिकायतें क्‍यों करते हैं। कारण बहुत सीधा सा है पर फिर भी हमें नजर नहीं आता। हमारे पास जो कुछ है उसका हमारे लिए कोई मूल्‍य नहीं। बस हम भागे जा रहे हैं उस सबके पीछे जो हमारे पास नहीं। और वो भी मिल जाए तो उसका भी मजा खतम। कभी इस नजरिये से भी सोचें कि बहुत कुछ हमारे पास ऐसा है जिसे हम कितना भी प्रयास करके या कितने भी पैसे खर्च करके नहीं पा सकते।

ऑक्‍सीजन जिसके कारण हम जिंदा हैं वो हमें मुफ्त में मिल रही है और उसे फेंफड़ो में भरने के लिए हमारी सांसे भी बिना कुछ  किये चल रही हैं। हमें लगता है कि हमारा जीवन हम चला रहे हैं हां कुछ हद तक ये सही है पर हमारे जीवन की ज्‍यादातर व्‍यवस्‍थाएं प्रकृति के सहारे ही चल रही हैं। हमें लगता है हम फसल उगाते हैं पर यदि धरती बीज उगाना बंद कर दे तो हम कुछ भी नहीं कर पायेंगे। दुनिया में बहुत से लोगों को भोजन तो छोडि़ए पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए ही कई किलोमीटर चलना पड़ता है। हमारे पास जितना कुछ है हम उसका आनंद उठाने की बजाय और ज्‍यादा इकट्ठा करने की दौड़ में व्‍यस्‍त हैं। हम लोगों के प्रति शिकायत भाव रखते हैं पर सोचिए जिनके प्रति हमें शिकायत है उन्‍होंने भी कभी ना कभी हमारे लिए कुछ अच्‍छा किया ही होगा। दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जो नितांत अकेले है, उनके लिए रिश्‍ते जैसे शब्‍द हैं ही नहीं।

कभी सोचें कि जो कुछ है हमारे पास कभी उसके प्रति हमने धन्‍यवाद का भाव प्रकट किया है। यदि नहीं तो अच्‍छी बात है कि अभी से इसे शुरू कर सकते हैं। जीवन को आनंदित करने की ये एक बहुत अच्‍छी युक्ति है। आप भले धार्मिक हों या नास्तिक, अमीर हों या गरीब रोज सुबह उठकर सबसे पहले उन बातों का शुक्रिया अदा करें इस ब्रह्मांड को जो आपके पास हैं। आपका जीवन के प्रति दृष्टिकोण बदलने लगेगा।

2- जब परिस्थितियां हमारे मुताबिक होती हैं तब हमें लगता है सब ऐसा ही चलता रहेगा। पर जब चीजें हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं तो हम उसे झेल नहीं पाते। हम या तो उससे लड़ने की कोशिश करते हैं या तनाव और दुख से खुद को बर्बाद कर रहे होते हैं। पर असल में जीवन एक सीधी रेखा की तरह नहीं चलता है। जब चीजें अच्‍छी होती हैं तो हमारी कोशिश यही रहती है कि बस सब ऐसे ही चलता रहे। सफलता के बारे में भी कहा जाता है कि सफलता पाना आसान है पर उसे कायम रखना मुश्किल। मुश्किल ही क्‍या असंभव सा ही है। हां कुछ समय अंतराल के लिए कायम रखा जा सकता है उसे। पर हम जब स्‍वीकार कर लेंगे कि शिखर के बाद ढलान शुरू होती ही है तो हम उस ढलान पर चलकर ही नये शिखरों पर पहुंचने के रास्‍ते भी खोज लेंगे।

जीवन ताश के पत्‍तों के खेल के जैसा है। हम इस खेल में ये नहीं कह सकते कि हमें सही पत्‍ते नहीं मिले, हमें हमारे मन मुताबिक पत्‍ते मिलेंगे तभी हम खेलेंगे। हमें जो मिला है उसे स्‍वीकार करके ही हमें खेलना है।

जीवन हमारे मुताबिक नहीं चलता है पर हां हमें स्‍वतंत्रता है चुनाव की कि हम किस रास्‍ते चलें, कैसे चलें। बहुत सी चीजें जो हमें मिली हैं उन्‍हें हम बदल नहीं सकते। पर उनसे उलझने या टकराव का रास्‍ता चुनने से हम कहीं पहुंचेंगे नहीं। इस बात पर हमारा ध्‍यान केंद्रित रहना चाहिए कि हमें कहां पहुंचना है। बाकी बातें जैसी की तैसी बनी रहेंगी इस बात को यदि हम स्‍वीकार कर लेंगे तो हमारे आगे बढ़ते रहने की संभावनाएं जिंदा रहेंगी।

निस्‍संदेह जो समस्‍याएं हैं हमारे सामने उनका हल खोजना ही है हमें। पर उनके अलावे भी बहुत कुछ ऐसा है जिसका हल खोजने में हमें अपनी ऊर्जा और समय व्‍यर्थ नहीं करना चाहिए। यदि हम उन्‍हें सुलझा भी लें तो भी हमें कुछ मिलना नहीं है। बस उन्‍हें स्‍वीकार कर लें और उसी हाल में छोड़ दें। जब हम आगे बढ़ेंगे तो ये बातें भी पीछे छूट जायेंगी।

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