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जब हो तनाव तो ये फॉर्मूला देगा तुरंत राहत

तनाव छोटा हो या बड़ा, हमारी सोच से वह बहुत हद तक संबंध रखता है। हमारा मन इस तरह से व्‍यवहार करता है कि जब वह परेशान होता है तो बहुत छोटी बातों में भी उलझकर रह जाता है और कभी-कभी बड़ी बातें भी इसे प्रभावित नहीं करतीं।

हम कहीं भी हों, किसी भी स्थिति में हों हमारे साथ एक बढि़या बात है कि हम अपनी कल्‍पना के घोड़े कहीं भी दौड़ा सकते हैं। हम शारीरिक रूप से भले एक जगह से दूसरी जगह ना जाएं पर हमारा मन कभी भी किसी भी यात्रा पर निकल पड़ता है। हम साइंस फिक्‍शन फिल्‍म देखते हैं तो हकीकत से कटकर उसमें कुछ समय के लिए खो जाते हैं। किसी नये अविष्‍कार या भविष्‍य में आने वाली किसी नयी तकनीक के बारे में पढ़ते हैं तो कल्‍पना करने लग जाते हैं कि भविष्‍य में ऐसा होगा, वैसा होगा जबकि अभी वर्तमान में हमने उसे देखा भी नहीं है।

बस मन की वर्तमान को छोड़कर बहुत आगे या बहुत पीछे भागने की आदत का ही हमें इस्‍तेमाल करना है।



लोग अक्‍सर जीवन में चल रही बातों से इतने तनाव में आ जाते हैं कि उनके दिमाग में एक ही प्रश्‍न चलता रहता है कि आगे क्‍या होगा। बस यहीं हमें रुकना हैं और ये देखना शुरू करना है कि अब तक क्‍या हुआ है।

हम थोड़ा खुद को इतिहास में ले जाएं, अपने परिवार के बड़ों और उनके पूर्वजों के जीवन की कठिनाईयों के बारे में सोचना शुरू कर दें तो पाएंगे कि हमारी अभी की समस्‍याएं इतनी गंभीर नहीं हैं कि उनके कारण तनाव पाला जाए।

पिछले सौ सालों,पांच सौ साल या हजारों साल में जो कुछ हुआ है और जिन परिस्थितियों का लोगों ने सामना किया है उनके बारे में पढ़ना शुरू करें।

स्‍ट्रेस मैनेजमेंट के एक सेमिनार में एक बुजुर्ग वक्‍ता देश की वर्तमान समस्‍याओं पर बात कर रहे थे। उनका कहना था कि लोग कहते हैं इतनी सारी समस्‍याएं हैं देश के सामने तो भविष्‍य में क्‍या होगा। उन्‍होंने बताना शुरू किया कि जब वे छोटे थे तो उनके समय के लोग भी यही चिंताएं करते थे पर उनकी चिंता भोजन के विषय में थी। हमारा देश उतना भोजन पैदा नहीं कर पाता था जितना कि जरूरत थी। तब विदेशों से अनाज आता था, राशन के माध्‍यम से लोगों तक पहुंचता था। पर भविष्‍य में वह एक समस्‍या नहीं रही हम आत्‍मनिर्भर हो गए। सड़कें नहीं थीं, वाहन नहीं थे, जरूरी सूचनाएं भी लोगों तक बहुत समय में पहुंच पाती थीं।

आज एक आम व्‍यक्ति भी इतना सुविधापूर्ण जीवन जी रहा है जितना पुराने समय में राजाओं तक को उपलब्‍ध नहीं था। आज हम शिकायत कर सकते हैं कि कानून ठीक से काम नहीं कर रहा, सरकार ठीक से काम नहीं कर रही। पर इतिहास में लोगों को ऐसे हमलों और युद्धों का सामना करना पड़ता था कि उनका सब कुछ भी लुट जाए तो भी वे कुछ कर नहीं सकते थे।

आज लोग दूसरे शहरों, स्‍थानों में जाकर रहने लगते हैं अच्‍छे अवसरों की तलाश में अपनी मर्जी से। पुराने समय में हजारों-लाखों लोगों को ना चाहते हुए भी अपने जमे-जमाये व्‍यवसायों, कारोबारों, घरों को छोड़ना पड़ जाता था विपरीत परिस्थितियों के कारण।

इतिहास में कितने व्‍यापक नरसंहार, लूटपाट, तबाहियां हुई हैं।आज हम शायद पहले की तुलना में तो बहुत सुरक्षित स्थितियों में रह रहे हैं।

अकाल की स्थिति में ही ना जाने कितने लोग भूख से मारे जाते थे। बड़े पैमाने पर फैलने वाली बीमारियों से लड़ने में लोग सक्षम नहीं थे। बेशक ये समस्‍याएं आज भी हैं पर बहुत छोटे स्‍तर पर। जरा सी बात मीडिया में और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर पहुंचने में समय नहीं लगता और सरकारों को भी तुरंत कार्यवाही करनी पड़ती है।

किसी एक व्‍यक्ति की परेशानी भी आज अंतर्राष्‍ट्रीय सुर्खियों में आ जाती है। विदेश में फंसा कोई नागरिक अपने फोन पर ही सोशल मीडिया के माध्‍यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचा पा रहा है। हमारी परेशानियों को सुलझाने के लिए तमाम तरह के उपकरण, माध्‍यम, मंच आज उपलब्‍ध हैं। कहा जाता है कि हर किसी को अपनी मदद खुद करनी पड़ती है और आज के समय में अच्‍छी बात ये है कि खुद की मदद करने के लिए भी इतने साधन आज उपलब्‍ध हैं जितने पहले कभी नहीं थे। हम अपनी किसी भी परेशानी के बारे में इंटरनेट से मदद ले सकते हैं, जानकारी ले सकते हैं और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं, दूसरों के अनुभव पढ़, सुन, देख सकते हैं। क्‍या वाकई गुजरे समय और इतिहास की तुलना में एक बहुत अच्‍छे समय में हम नहीं जी रहे हैं ?

तो जब भी आप परेशानी में हों तो अपनी टेंशन को दूर करने के लिए इस फार्मूले को जरूर आजमाईये। इतिहास की यात्रा पर चले  जाईये। तनाव से बचने का ये उपाय आपके लिए बहुत मददगार साबित होने वाला है।

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